Friday, February 25, 2011
Wednesday, February 16, 2011
Monday, February 14, 2011
Dost ek saahil hai tufaano ke liye,
Dost ek aaina hai armaano ke liye,
Dost ek mehfil hai anjaano ke liye,
Dosti ek khawaahish hai aap jaise dost ko paane ke liye !!
Jaan hai mujhko zindagi se pyaari,
Jaan ke liye kar doon kurbaan yaari,
Jaan ke liye todd doon dosti tumhaari,
Ab tumse kya chhupaana,
Tum hi toh ho jaan hamaari !
dosti ke naam ko na badnam karo
mere bharose ko na badnam karo,
meri dosti ko apna lena
humse ek baar hath mila lena...
Mushkilo se ghabra ke ab jina nahi chahte,
Dur tum se hoke ab rehna nahi chahte,
Yun to dost bahut bane iss zindagi me
Par aap jaise dost ko khona nahi chahte.
Yahi to khoobsurat dosti ka naata hai,
Jo bina kisi shart ke jiya jaata hai,
Rahe duriyan darmiyan to parwaah nahi,
Dost to harpal dil me basaya jaata hai...
Dost ek aaina hai armaano ke liye,
Dost ek mehfil hai anjaano ke liye,
Dosti ek khawaahish hai aap jaise dost ko paane ke liye !!
Jaan hai mujhko zindagi se pyaari,
Jaan ke liye kar doon kurbaan yaari,
Jaan ke liye todd doon dosti tumhaari,
Ab tumse kya chhupaana,
Tum hi toh ho jaan hamaari !
dosti ke naam ko na badnam karo
mere bharose ko na badnam karo,
meri dosti ko apna lena
humse ek baar hath mila lena...
Mushkilo se ghabra ke ab jina nahi chahte,
Dur tum se hoke ab rehna nahi chahte,
Yun to dost bahut bane iss zindagi me
Par aap jaise dost ko khona nahi chahte.
Yahi to khoobsurat dosti ka naata hai,
Jo bina kisi shart ke jiya jaata hai,
Rahe duriyan darmiyan to parwaah nahi,
Dost to harpal dil me basaya jaata hai...
Thursday, February 10, 2011
My Village Pauri
आज भी मैरे गांव की कुछ खट्टी मीठी यारें मेरे दिल को परेशान करती हैं पर अब लगता है कि सबकुछ बदल गया होगा मैरे गांव में, हर राह हमें भूल चुकी होगी, हर डाली हमसे दूर हो चुकी होगी, खेतों में नंगे पांव दोड़ना अब रह नही गया है, चैरी करके खाई जाने वाली ककड़ी, अमरुद, आम, आडू कहां गयें होगे............... मैं जाउंगा जब तो यह सब लोट आयेगा क्या मैरे जहन मैं............. नही कभी नही.......... गुजरा कल लोटता नही.............. गांव तो मेरा ही है ना....... मेरी दादी का जोर-जोर से आवाज लगाना.......... रात को लेट आने पर मैरे पापा के द्वारा ढांट खाना, पापा मुर्गा बनाया करते थे................. रोना आता था आज प्यार आता है......... अभी मैरे पापा की तबियत खराब है तौ क्या हुआ ठीक हो जायेंगे........... मुझें ढांटेगे...... मैं अपने गांव, अपने दोस्तों को बहुत मिस करता हँू अपने परिवार को बहुत प्यार करता हॅू देखों मेरा गांव मेरे पास है।
आपक
नेगी
Mujhe Intjar Na Tha Un Palo Ka
मुझें इंतजार न था उन पलों
मुझें इंतजार न था उन पलों का
जो आ गये मेरी जिन्दगी में तूफान बनकर,
उठा ले गये मेरी हर खुशी को पल दो पल मैं,
मै घिर सा गया जिन्दगी की तन्हाईयों मैं!!
मुझें इंतजार न था उन पलों का ...........................
दर व दर भटकता हँू अब मैं
उनकी यादों को दिल मैं समेटे हुए
जो दूर बहुत है मेरी परछाईयों से
मिलने को अब मन करता है उनको
न मिल सकता मैं अब पल दो पल मैं,
मुझें इंतजार न था उन पलों का .............................
मुझें डर है अपनों की शिकायत का
मुझें कहते है मै दीवाना बन गया
वह कहती है कि मुझें मिलो न अब इतना तुम
मै डर सा गया उनकी नाराजगी से
न मिल सकता अब मै पल-पल उनको
मुझें इंतजार न था उन पलों का .................................
सजा ए मौत हर जुल्म की सजा नही होती।
कास कि प्यार में मौत ए जिन्दगी की सजा होती।।
Maine Aanshuo Ko Dekha hai
मैंने आशुओं को देखा है। ......
मैंने आशुओं को देखा है।
जो बह गये उनसे खुशी के लम्हों में!
जो सूख गयें पलकों तक आते-आतें ही..... उनकी याद मैं।
वक्त कभी दिया ही नही उन्होंने अब, अपने दिल की बात उनसे कह पाने का।
फिर भी लगा कि वो है कहीं मेरी अनकहीं कहानियों मैं।
लगा कि मैंने आशुओं को देखा है पलभर के लिए.....................
मैं उनके लिए अतीत बन कर रह गया अब!
लेकिन मैरे लिए वे जिन्दगी का जख्म बन गये हैं।
वे तो भूल गयें हैं पल दो पल में।।
जख्म जो दिया उसने वह न सिमट सका इन पलों में।
मैने भुलाते देखा है उसको अपनी यादों को .................................
दूरियां बढ़ती गई और वक्त सिमटता गया।
फासले अब मीलों के हो गयें, जो सिमेटे थे हमने कुछ पलों में।
यादें भी धुधंली सी हैं अब, मिटती चली गई, परछाईयां।
खोजा उनकों इस भीड़ में तो लगा कि वो कहीं हैं............
सोचा कि बहम है दिल का, उनकी यादों का ....................
चारों तरफ एक अजीब उदासी हैं।
चाहकर भी चाहत मेरी प्यासी है।।
जानकर भी वो अनजान बनी हैै।
न जाने यह मौहब्बत कैसी है।।
कोई ख्याल होता तो भूल जाता।
वो तो हर सांस में बसी है।।
क्या कहूं कितना गहरा है ‘‘दर्द’’ दिल का।
अब तो गम में भी आती हंसी है।।
वैसे तो हर मोड़ पर।
मिल जाते हैं दोस्त यार।।
पर वो नटखट, अजीब सी है।
अब नही तमन्ना मुझको किसी की।।
बस एक याद मेरी, मेरी खुशी है।
Negi
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