मैंने आशुओं को देखा है। ......
मैंने आशुओं को देखा है।
जो बह गये उनसे खुशी के लम्हों में!
जो सूख गयें पलकों तक आते-आतें ही..... उनकी याद मैं।
वक्त कभी दिया ही नही उन्होंने अब, अपने दिल की बात उनसे कह पाने का।
फिर भी लगा कि वो है कहीं मेरी अनकहीं कहानियों मैं।
लगा कि मैंने आशुओं को देखा है पलभर के लिए.....................
मैं उनके लिए अतीत बन कर रह गया अब!
लेकिन मैरे लिए वे जिन्दगी का जख्म बन गये हैं।
वे तो भूल गयें हैं पल दो पल में।।
जख्म जो दिया उसने वह न सिमट सका इन पलों में।
मैने भुलाते देखा है उसको अपनी यादों को .................................
दूरियां बढ़ती गई और वक्त सिमटता गया।
फासले अब मीलों के हो गयें, जो सिमेटे थे हमने कुछ पलों में।
यादें भी धुधंली सी हैं अब, मिटती चली गई, परछाईयां।
खोजा उनकों इस भीड़ में तो लगा कि वो कहीं हैं............
सोचा कि बहम है दिल का, उनकी यादों का ....................

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