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Thursday, February 10, 2011

My Village Pauri



आज भी मैरे गांव की कुछ खट्टी मीठी यारें मेरे दिल को परेशान करती हैं पर अब लगता है कि सबकुछ बदल गया होगा मैरे गांव में, हर राह हमें भूल चुकी होगी, हर डाली हमसे दूर हो चुकी होगी, खेतों में नंगे पांव दोड़ना अब रह नही गया है, चैरी करके खाई जाने वाली ककड़ी, अमरुद, आम, आडू कहां गयें होगे............... मैं जाउंगा जब तो यह सब लोट आयेगा क्या मैरे जहन मैं............. नही कभी नही.......... गुजरा कल लोटता नही.............. गांव तो मेरा ही है ना....... मेरी दादी का जोर-जोर से आवाज लगाना.......... रात को लेट आने पर मैरे पापा के द्वारा ढांट खाना, पापा मुर्गा बनाया करते थे................. रोना आता था आज प्यार आता है......... अभी मैरे पापा की तबियत खराब है तौ क्या हुआ ठीक हो जायेंगे........... मुझें ढांटेगे......  मैं अपने गांव, अपने दोस्तों को बहुत मिस करता हँू अपने परिवार को बहुत प्यार करता हॅू देखों मेरा गांव मेरे पास है। 


आपक
नेगी

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