चारों तरफ एक अजीब उदासी हैं।
चाहकर भी चाहत मेरी प्यासी है।।
जानकर भी वो अनजान बनी हैै।
न जाने यह मौहब्बत कैसी है।।
कोई ख्याल होता तो भूल जाता।
वो तो हर सांस में बसी है।।
क्या कहूं कितना गहरा है ‘‘दर्द’’ दिल का।
अब तो गम में भी आती हंसी है।।
वैसे तो हर मोड़ पर।
मिल जाते हैं दोस्त यार।।
पर वो नटखट, अजीब सी है।
अब नही तमन्ना मुझको किसी की।।
बस एक याद मेरी, मेरी खुशी है।
Negi


कोई ख्याल होता तो भूल जाता।
ReplyDeleteवो तो हर सांस में बसी है।।
क्या कहूं कितना गहरा है ‘‘दर्द’’ दिल का।
अब तो गम में भी आती हंसी है।।
बहुत ही सुन्दर लब्जो मे लिखि है यह कविता आपने! बधाई!